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Sunday 1 September 2019

तो इस वजह से उंगलियां चटकाने पर होती है आवाज़ | उंगली चटकाना हमारी हड्डियों के लिए सही है या गलत

Cracking Knuckles Habit Good Or Bad

What Happens When We Crack Our Knuckles in Hindi

यह खबर पढ़कर सचमुच आपके दिमाग की बत्ती जल जाएगी। आप सब लोगो ने कभी न कभी बचपन में या अभी अपनी उंगलियां ज़रूर चटकाई होगी। जिसे आम बोलचाल की भाषा में चटका बजाना भी कहा जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि उंगलियों को चटकाने पर वह आवाज़ क्यों आती है? चलिए अमरीका और फ्रांस के शोधकर्ताओं ने यह पता लगा लिया हैं। उनके अनुसार यह बात गणित के तीन समीकरणों की मदद से समझाई जा सकती है।

मोबाइल पर घंटों चैट और कम्प्यूटर पर टिपिर-टिपिर करने के बाद क्या करते हैं आप? अंगड़ाई लेने का मन करता है. हाथ को कितनी तरह से मोड़ा-तोड़ा जा सकता है ये उसी वक़्त पता चलता है. लेकिन ऑफिस या मीटिंग में बैठे हों तो ऐसा करने में थोड़ा अटपटा लगता है. तब क्या करते हैं? उंगलियां फोड़ने के बारे में क्या विचार है?

हीही. मज़ा आता है न. अब चटकाने न लग जाना. पहले पढ़ लो. मेरी मां बहुत डांटती हैं उंगलियां फोड़ने पर. कहती हैं इससे उंगली मोटी हो जाती हैं और आंख के नीचे काले घेरे बन जाते हैं. हालांकि ये सिर्फ हर मां की तरह की जाने वाली फिक्र और फर्जी डराने वाली बात है. और ये बात साइंस के मुताबिक गलत भी है. लेकिन मां का मना करना गलत नहीं है.

जी हां, सुनने में अजीब है पर इस बात का पता गणित के मॉडल चला है कि यह आवाज़ क्यों आती है। आपको बता दे कि हड्डियों के जोड़ में एक खास किस्म का तरल पदार्थ होता है। इस तरल पदार्थ में बुलबुले फूटने की वजह से ही यह आवाज आती है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस बात पर सदियों से बहस होती रही है, लेकिन अब जाकर इसकी सही वजह मालूम हुई है।


फ्रांस के रहने वाले भारतीय मूल के छात्र विनीत चंद्रन सुजा ने इसका पता लगाया है। दरअसल एक दिन सुजा क्लास में अपनी उंगलियां चटका रहे थे, तभी उन्हें गणित के मॉडल के आधार पर इसका पता लगाने की सूझी।
विनीत ने इसके लिए अपने अध्यापक डॉ अब्दुल बरकत के निर्देशन में गणितीय समीकरणों की एक पूरी विस्तृत श्रृंखला तैयार की। इन गणितीय मॉडल की मदद से कोई भी बता सकता है कि उंगलियों और कलाई के जोड़ों को चटकाने पर आवाज़ क्यों और कैसे आती है।

जब भी हम बहुत देर तक लगातार काम करते रहते है तो फिर थोड़ी देर रुककर अपनी उंगली और सर या और दूसरी हड्डियाँ चिटकाते हैं तो हमें आराम मिलता है और हम रिफ्रेश फील करने लगते हैं. अक्सर आफिसों में, घरों में या कालेजों में लोग
ऐसा करते हुए दिख जाते हैं. लेकिन आपको ये जानकार हैरानी होगी कि हड्डियाँ चिटकाने से हमारी हड्डियाँ कमजोर होती हैं.

उंगलियों को फोड़ना या चटकाना सेहत के लिए ठीक नहीं है. डॉक्टरों का मानना है कि हाथ या पैर की उंगलियां चटकाने से हडि्डयों पर बुरा असर पड़ता है. इससे काम करने की क्षमता कम होती है. इस आदत को छोड़ देना चाहिए.

उंगलियों के जोड़ और घुटने और कोहनी के जोड़ों में एक खास लिक्विड होता है. इसका नाम होता है . ये लिक्विड हमारी हडि्डयों के जोड़ों के लिए ग्रीस का काम करता है जो कि हडि्डयों को एक दूसरे से रगड़ खाने से रोकता है. उस लिक्विड में मौजूद गैस जैसे कार्बन डाई ऑक्साइड नई जगह बनाती है. इससे वहां बुलबुले बन जाते हैं. अब जब हम हड्डी चटकाते हैं तो वही बुलबुले फूट जाते हैं. तभी कुट-कुट की आवाज़ आती है.

जब 1 बार जोड़ों में बने बुलबुले फूट जाते हैं उसके बाद उस लिक्विड में वापस गैस घुलने में करीब 15 से 30 मिनट लगते हैं. इसीलिए एक बार उंगलियां चटक जाती हैं तो दोबारा चटकाने पर आवाज़ नहीं आती है. चाहे जितनी बार कोशिश कर लो, जब तक बुलबुले नहीं बनेंगे तब तक कुट-कुट नहीं बोलेगा.

एक रिपोर्ट के मुताबिक हडि्डयां आपस में लिगामेंट से जुड़ी होती हैं. बार-बार उंगलियां चिटकाने से उनके बीच होने वाला लिक्विड कम होने लगता है. अगर ये पूरा ख़त्म हो जाए तो गठिया हो सकता है.

इसके साथ ही यदि जोड़ों को बार-बार खींचा जाए तो हमारी हडि्डयों की पकड़ भी कम हो सकती है. हालांकि इस पर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के साथ-साथ कई जगह शोध किए गए हैं. लेकिन उंगली चिटकाने से बीमारी होने की बात हर शोध में साबित नहीं हुई है. हां इससे कुछ दिक्कतें हो सकती हैं.

Sunday 10 March 2019

गर आप भी हैं नौकरीपेशा तो कर लें चेक, कहीं आपमें भी तो नहीं डिप्रेशन के ये लक्षण

अकसर हम लोग डिप्रेशन के संकेतों को अनदेखा कर देते हैं। इन्‍हें समय पर पहचान कर अवसाद से उबर सकते हैं।


डिप्रेशन या अवसाद ऐसी समस्‍या है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता और यही इसके समाधान में सबसे बड़ी बाधा है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन आगाह कर चुका है कि 2020 तक डिप्रेशन दुनिया की दूसरी बड़ी बीमारी बन जाएगी। लेकिन हममें से बहुत से लोग जानते ही नहीं कि डिप्रेशन को कैसे पहचानें। 

जानकार कहते हैं कि अगर समय पर डिप्रेशन से गुजर रहे व्‍यक्ति से मेलजोल बढ़ाया जाए तो इससे उबरने में बड़ी मदद हो सकती है। डिप्रेशन के कुछ खास लक्षण होते हैं, खुद डिप्रेशन से गुजर रहा व्‍यक्ति इन संकेतों को पहचान कर इसके इलाज के लिए आगे बढ़ने का विचार कर सकता है। आइए नजर डालें डिप्रेशन के कुछ संकेतों पर: 

उदासी और खालीपन 
अगर आपको अकसर मन में खालीपन और उदासी महसूस हो तो इसे अनदेखा न करें। इसके सा‍थ अगर खुद से नफरत हो और लगने लगे कि दुनिया में आपकी कोई अहमियत नहीं है तो समझ जाइए आप डिप्रेशन का शिकार हो चुके हैं। 

घर से बाहर निकलने की इच्‍छा न हो 
बस आप अपने घर में अपने कमरे में अकेले रहना चाहें और बाहर जाकर लोगों से घुलना मिलना न चाहें तो बहुत मुमकिन है कि आपके मन में अवसाद घर कर रहा है। 

अनिद्रा की परेशानी 
अगर आपको लंबे समय से नींद नहीं आती है या रातों को नींद उचट जाए फिर नहीं आए तो समझ लिए यह डिप्रेशन की निशानी है। समय रहते इसका निवारण खोजने की कोशिश करें। 

बिस्‍तर से उठने का जी न करे 
कभी-कभी तो ठीक है लेकिन अगर अक्‍सर रात भर सोने के बाद बिस्‍तर से उठने का मन न करे तो यह सामान्‍य नहीं है। आप खुद को दुनिया से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

किसी एक चीज पर फोकस न कर पाएं 
जब आप आसानी से एकाग्र न हो पाएं या बार-बार रोजमर्रा के कामों में भी आपकी एकाग्रता भंग होने लगे तो समझ जाइए कि ये डिप्रेशन के लक्षण हैं। 

एंग्‍जाइटी और मूड खराब होना 
अगर आप हमेशा नर्वस महसूस करें, तनाव में रहें और ऐसा लगता रहे कि कहीं कुछ गड़बड़ होने वाला है तो बहुत मुमकिन है कि ये डिप्रेशन के लक्षण हों। इसके अलावा बिना किसी बात के मूड खराब होना भी डिप्रेशन का संकेत है। 

खुदकुशी के ख्‍याल 
अगर किसी को बार-बार अपना जीवन खत्‍म करने का ख्‍याल आए और लगे कि अब मेरे जीवित रहने का कोई कारण नहीं है, तो यह संकेत है कि वह गंभीर डिप्रेशन का शिकार है। सही समय पर डॉक्‍टरी सलाह से इससे बचा जा सकता है। 

क्या आप हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो कर रहे हैं? खुद को ऐसे जाचें

लाइफस्टाइल पर ध्यान न देने से लोग कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो आपको कुछ हेल्दी आदतें भी डालनी होंगी। आप खुद से इन आदतों के बारे में पूछें कि क्या आप इन्हें फॉलो करते हैं।


आजकल की व्यस्त दिनचर्या में लोग अकसर अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देते हैं। अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान न देने के कारण लोग कम उम्र में ही कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डायबीटीज, हाइपरटेंशन, आर्थराइटिस जैसी बीमारियां काफी आम हो गई हैं। ऐसे में स्वस्थ लाइफस्टाइल के अलावा रूटीन हेल्थ चेकअप भी जरूरी है। रूटीन चेकअप की तरह ही महत्वपूर्ण है खुद में इन आदतों की जांच करना। 

अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो आपको कुछ हेल्दी आदतें भी डालनी होंगी। वक्त आ गया है कि आप खुद से इन आदतों के बारे में पूछें कि क्या आप इन्हें फॉलो करते हैं। 

क्या रोज सुबह गुनगुना पानी पीते हैं? 
सुबह उठकर एक गिलास (200 से 250 एमएल) गुनगुना पानी जरूर पीएं। यह एक तरफ जहां शरीर की चर्बी को कम करता है, वहीं पेट के लिए भी अच्छा है। 

क्या आप हेल्दी ब्रेकफास्ट करते हैं? क्या आप मौसमी फल खाते हैं? 
सेहत के लिहाज से मौसमी फल-सब्जी ज्यादा फायदेमंद हैं। इनमें विटामिन्स और मिनरल्स की भरमार होती है। आजकल संतरा, गाजर, अमरूद, अंगूर, मटर आदि खूब मिलते हैं। इन्हें अपनी डाइट में शामिल करें। 
ब्रेकफस्ट राजा की तरह, लंच आम आदमी की तरह और डिनर गरीब की तरह करें। यानी हेवी ब्रेकफस्ट जरूर करना चाहिए। अंकुरित अनाज या ड्राईफ्रूट्स जरूर शामिल करें। 

क्या आप सीढ़ियों का ज्यादा उपयोग करते हैं? 
जितना संभव हो ऑफिस, मॉल या कहीं भी लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का ही प्रयोग करें। इससे कैलरी बर्न होगी और शरीर भी ऐक्टिव रहेगा। 

क्या आप भरपूर मात्रा में विटमिन सी लेते हैं? 
विटामिन-सी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इससे जहां शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है वहीं यह शरीर से हानिकारक पदार्थ को बाहर निकालने में भी मददगार है। 

क्या किचन और बाथरूम में साफ-सफाई रहती है? 
अच्छा और पौष्टिक खाना जितना सेहतमंद होने के लिए जरूरी है, उतना ही जरूरी है साफ-सफाई, खासकर किचन और बाथरूम की। ये दोनों ऐसी जगहें हैं जो सबसे ज्यादा गंदी होती हैं और हम सफाई का सबसे कम ध्यान इन्हीं जगहों पर देते हैं। 

Monday 7 January 2019

आपकी नाभि भी रुई उगलती है,जानें क्यों और कैसे..

कैसे अपनी नाभि साफ करें
नाभि में इन्फेक्शन के लक्षण, कारण
नाभि से जुड़े ये 7 मज़ेदार तथ्य चौंका देंगे


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कभी-कभी तो लगता है की एक फैक्ट्री संग लिये घूम रहा हूँ | पर परेशानी ये है की किसी को बता नहीं सकता | अब भला किस मुँह से किसी से कहते फिरेंगे की भैया हमारी नाभि हर सुबह रुई उगलती है | लोग कहेंगे की नहाते धोते नहीं होगे, साफ़ सफाई नहीं रखते होगे, खान पान सही नहीं होगा | इतने सवालों के डर के मारे कभी ज़बान पे लाये ही नहीं ये बात | कुछ दोस्तों से बातें की तो पता चला उनकी नाभि से भी रुई उत्पादन धड़ल्ले से चल रहा है | थोड़ा गूगल पे जाके यहाँ वहाँ की खोज किये तो पता चला की ये समस्या ज्यादातर नर और मादाओं को है | पर उस दिन जब BBC की रिपोर्ट पढ़ी ( अरे वही BBC जो विश्व की सबसे बड़ी न्यूज़ एजेंसी है ) तो सारे जवाब खुलने लगे | तो आज हम लाये है आपके लिये एक खास रिसर्च जो बताएगी की आपकी नाभि में हर रोज ये रुई आती कहा से है ?

झपकी लेने से संबंधित इन तथ्‍यों से अनजान हैं आप


क्या है ये नाभि में रुई का माज़रा ?

यहाँ आपको दो महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानने की जरूरत है | पहला यह है कि बाहर की दुनिया में इस समस्या को "Navel Fluff" के नाम से जाना जाता है, हालांकि कभी-कभी वैज्ञानिक भाषा में इस परेशानी को "Belly Button Lint" (बीबीएल) कहते हैं | दूसरी बात यह है कि Navel Fluff की ये समस्या अक्सर मध्यम आयु वर्ग के ज्यादा बाल वाले पुरुषों, विशेष रूप से जिन्होंने हाल ही में वजन बढ़ाया हो उनमे अधिक संख्या में पायी जाती है |

तो भैया, किसने की खोज इस रुई की ?


सिडनी विश्वविद्यालय के Karl Kruszelnicki नाम के एक शोधकर्ता के ये निष्कर्ष हैं | एक ऑस्ट्रेलियाई विज्ञान रेडियो शो के दौरान डॉ कार्ल से उनके एक प्रशंसक ने सवाल किया की "क्या आपको पता है की ये नाभि में हर रोज़ रुई कहा से आ जाती है ?" | यही कारण है जिसने Kruszelnicki को इस सवाल का जवाब ढूँढने के लिए प्रेरित किया |  अपने शोध के लिए, Kruszelnicki को 2002 में नोबेल पुरस्कार के सम्मान से नवाजा गया |

ये रुई रोज़ बनती कैसे है ?

डॉक्टर कार्ल और उनके सहयोगियों ने जब इस विषय पर रिसर्च करना शुरू किया तब उनको ये बात समझ में आयी की दरअसल हर रोज सुबह नाभि में भरने वाली रुई आती कहाँ से हैं | होता कुछ यूँ हैं की हम जो भी कपड़े पहनते है उन कपड़ों का जो हिस्सा हमारी नाभि के इर्द-गिर्द होता है, उसके भीतरी हिस्से से हमारे नाभि पर उपस्थित बाल रुई चुराते हैं और नाभि में भर देते हैं | दरअसल ये हमारे बाल नहीं, बल्कि उनमे मौजूद एक खास तरह के सूक्ष्मजीव की वजह से होता है |




डॉक्टर कार्ल ने अपनी रिसर्च में ये भी पाया की आप जितना पुराना कपडा पहनेंगे उतना ही कम Navel fluff जमा होगा, ये कोई चिंता का विषय नहीं है, ना ही अपमान कि कोई बात ये शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
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आज हम बात करेगे अपने शरीर के बहुत ही सेंसिटिव अंग की. जिसके अलग-अलग नाम है कोई नाभि कहता है, कोई सुंडी, कोई belly button तो कोई navel. चाहे जो मर्जी कहे पता तो सबको लग गया ना.. Let’s begin…
1. नाभि क्या है: नाभि एक निशान है. दरअसल, पैदा होने के बाद जब माँ की नाल से जुड़ी बच्चे की गर्भनाल को डाॅक्टर्स द्वारा बाँधकर अलग किया जाता है तो बच्चे के पेट पर एक निशान बन जाता है जिसे हम नाभि बोलते हैं.
2. नाभि हमारे शरीर का सबसे गंदा भाग होता है. इसमें लगभग 1458 प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं.
3. दुनिया के 4% लोगो की नाभि बाहर निकली हुई है बाकी 96% की नाभि अंदर घुसी हुई है. बाहर निकली हुई नाभि तब होती है जब डाॅक्टर्स गर्भनाल को ठीक से बाँध नही पाते.
4. बाहर निकली हुई नाभि को कि नाभि विशेषज्ञ से मिलकर ऑपरेशन से अंदर की तरफ कर सकते है इस तरह के ऑपरेशन को ‘Umbilicoplasty’ कहते हैं.
5. नाभि केवल दूध पिलाने वाले यानि स्तनधारी जानवरों में ही पाई जाती है. अंडे देने वाले जानवरों में नाभि नही होती.
6. स्त्री की नाभि की तुलना में पुरूष नाभि के आस-पास ज्यादा रोंगटे(छोटे बाल) होते हैं



आज हम बात करेगे अपने शरीर के बहुत ही सेंसिटिव अंग की. जिसके अलग-अलग नाम है कोई नाभि कहता है, कोई सुंडी, कोई belly button तो कोई navel. चाहे जो मर्जी कहे पता तो सबको लग गया ना.. Let’s begin…
1. नाभि क्या है: नाभि एक निशान है. दरअसल, पैदा होने के बाद जब माँ की नाल से जुड़ी बच्चे की गर्भनाल को डाॅक्टर्स द्वारा बाँधकर अलग किया जाता है तो बच्चे के पेट पर एक निशान बन जाता है जिसे हम नाभि बोलते हैं.
2. नाभि हमारे शरीर का सबसे गंदा भाग होता है. इसमें लगभग 1458 प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं.
3. दुनिया के 4% लोगो की नाभि बाहर निकली हुई है बाकी 96% की नाभि अंदर घुसी हुई है. बाहर निकली हुई नाभि तब होती है जब डाॅक्टर्स गर्भनाल को ठीक से बाँध नही पाते.
4. बाहर निकली हुई नाभि को कि नाभि विशेषज्ञ से मिलकर ऑपरेशन से अंदर की तरफ कर सकते है इस तरह के ऑपरेशन को ‘Umbilicoplasty’ कहते हैं.
5. नाभि केवल दूध पिलाने वाले यानि स्तनधारी जानवरों में ही पाई जाती है. अंडे देने वाले जानवरों में नाभि नही होती.
6. स्त्री की नाभि की तुलना में पुरूष नाभि के आस-पास ज्यादा रोंगटे(छोटे बाल) होते हैं.
7. नाभि में कभी भी कान, नाक की तरह छेद ना कराएं क्योकिं नाभि छेद को ठीक होने में 9 महीने लगते है जबकि नाक और कान का छेद केवल 6 हफ्ते में ठीक हो जाता हैं.
8. किन्हीं दो आदमियों की नाभि एक जैसी नही हो सकती. हर व्यक्ति की नाभि अलग-अलग होती है. क्योकिं हर किसी की नाभि में अलग-अलग बैक्टीरिया होते हैं.
9. महिलाओं की नाभि छूने या चूमने से उनमें सेक्स बढ़ता है. यह बहुत कामुक स्थान होता हैं.
10. नाभि को छूने से होने वाले डर को “Omphalophobia” कहते हैं.
11. सरसों का तेल नाभि में लगाने से फटें हुए होंठ ठीक हो जाते है और साथ में मुलायम भी.
12. नाभि का खिसकना पेट में दर्द का कारण हो सकता है और आपको दस्त लग सकते है. नाभि का सही स्थान पर रहना स्वस्थता का भी प्रतीक हैं. नाभि शरीर के सात मूल चक्रों में से एक चक्र हैं.
13. पुरूषों की नाभि में ज्यादा रूई मिलती है. जिन लोगो की नाभि बाहर की तरफ होती है उन्हें बस यही एक फायदा मिलता है. ग्राहम बारकर नाम के आदमी ने नाभि से निकली हुई सबसे ज्यादा रूई इकट्ठी करके वर्ल्ड रिकाॅर्ड भी बना दिया हैं.
14. “Karolina Kurkova” जिसे 2008 में दुनिया की सबसे सेक्सी महिला चुना गया था उसकी नाभि ही नही थी. अरे, ये कैसे संभव हुआ ? ☺ दरअसल, जब वह बच्ची थी तो उन्हें एक अलग तरह का हर्निया हो गया था. जिसे सर्जरी से ठीक किया गया. इससे नाभि की जगह इनके पेट पर सिर्फ डिम्पल जैसा निशान रह गया.
15. साइंटिस्ट, नाभि पर शोध करने के लिए लाखों रूपए खर्च कर चुके है. Q कि उनका मानना है कि नाभि की ठीक जगह से कई खेलों में फायदा मिलता है जैसे: नाभि नीचे है तो तैरने में, नाभि ऊपर है तो दौड़ने में etc.